Sunday, 14 May 2017

ASHURCHULA (The King of Hills)असुरचुला मंदिर

असुरचुला मंदिर :-प्राचीन काल सेें उपस्थित सभी पुराणों में इस बात का उल्लेख है की भगवान् शिव् को मनुष्य,देवता,असुर,गन्धर्व सभी अपने आराध्य के रूप में पूजते है। केवल ॐ धुन को कहने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते है।
कहा जाता है की जब राजा दश्र के अपमान से क्रोधित होके माता सती ने हवन कुण्ड में खुद को समाहित कर लिया तो यह समाचार पाके भगवान शिव ने रूद्र रूप धारण कर लिया और सती के शव को अपने सर में उठाकर तांडव करने लगे।उनके नेत्रों से निकले अश्रु जिस जिस स्थान पर पड़े वहा शक्तिपीठ स्थापित हो गया।।
असुरचुला भी उन्ही शक्तिपीठ में से एक है।
मान्यता है की जो भी सच्चे मन से कुछ भी (भगवान शिव के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है) मांग लेता है ,उसे उसका फल अवश्य मिलता है।।असुरो के आराध्य होने के कारण भगवान शिव को आसुरेश्वर भी कहा जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


पहुचने का रास्ता:- 

पिथौरागढ़ शहर से 11 किमी दूर नैकिना गांव से मंदिर का रास्ता प्रारम्भ होता है।
मैप नैकिना गांव 















   
   भगरशिला से देखने पर :-

             












मंदिर के रास्ते मे प्रकति की सुंदरता सबका मन मोह लेती है।






काफूल देवी (कामधेनु)
काफूल देवी(कामधेनु)

काफलों का स्वाद आपको यात्रा के दौरान मिलता रहेगा।

























मंदिर प्रागण से देखने पर:-










क्या आप त्रिशूल में बैठे पक्षी को देख पाए?































असुरचुला मंदिर




















सायकाल मे मंदिर की झलक


सूर्योदय की पहली किरण

मंदिर के भीतर का दृश्य:-










कुछ मनोहर दृश्य:-














मंदिर की वीडियो:-



down to Hill

  


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धन्यवाद

        महादेव आप सभी का कल्याण करे।।